पोमचा क्या है ? l Pomcha Kya Hai in Hindi

पोमचा क्या है ? l Pomcha Kya Hai in Hindi

पोमचा क्या है ? l Pomcha Kya Hai in Hindi

पोमचा क्या है ? l Pomcha Kya Hai in Hindi – तो दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको पोमचा क्या है ? l Pomcha Kya Hai in Hindi के बारे में बताने वाले है तो आर्टिकल ध्यान से पढ़ियेगा ताकि आपको इसके बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो सके तो आईये जानते है, पोमचा क्या है ? l Pomcha Kya Hai in Hindi

पोमचा क्या है ? l Pomcha Kya Hai

हमारे देश भारत में कई परंपराओं और मान्यताओं से जुड़ा हुआ देश है। यहाँ अलग अलग राज्य या जिलों में अलग अलग लोक त्योहार, मान्यताएं और परंपरा होती है। हर किसी को हर परंपरा के बारे में पता नही होता। Pomcha भी इसी प्रकार का एक स्थानीय वस्तु है जो सिर्फ कुछ ही राज्य में उपयोग होता है। अभी हाल ही बहुत लोगो के जरिये से Pomcha के बारे में पूछा जा रहा है।

आज हम आपको अपने इस आर्टिकल के माध्यम से बताने वाले है की आखिर पोमचा क्या है ?, Pomcha के उपयोग एवं इससे जुड़ी पूरी जानकारी विस्तार से जानते है।

Pomcha Kya Hai

पोमचा, राजस्थान से जुड़ी एक परंपरा से संबंधित शब्द है। पोमचा राजस्थान में ओढ़ी जाने वाली प्रसिद्ध ओढ़नी होती है। जिसे खासकर के नव विवाहित गर्भवती महिलाये जब बच्चे को जन्म देती है तो उनको उनके मायके से पोमचा दिया जाता है जब वे महिलाये ससुराल में होती है। तो मायके से दिया जाने वाला ये पोमचा पीला होता है। पोमचा का रंग पीला एवं लाल हो सकता है। हलाकि पोमचा का अर्थ कमल के फुल के अभिप्राय से युक्त होता है। पीला पोमचा ओढ़ने के लिए

पोमचा के अलावा कितने प्रकार की होती है ? ओडनी

राजस्थान में ओढ़े जाने वाली ओढ़नी की कुल 3 प्रकार से रंगाई की जाती है। राजस्थान में ओढ़नी में रंगाई करने के प्रकार क्रमश पोमचा, लहरिया और चूंदड़ होती हैं। पोमचा तो आप ऊपर जान ही चुके है, लहरिया ओढ़नी के बारे में बात करे तो राजस्थान की महिलाए सावन में लहरिया ओढ़नी को ओढ़ती है। लहरिया ओढ़नी में लहरों की आकृति में रंगों को भरा जाता है इसीलिए इसे लहरिया कहा जाता है।

चुंदड़ ओढ़नी की बात करे तो राजस्थान में इसका काफी महत्व है। चुंदड लाल रंग की ओढ़नी होती है जिसपर विशेष तरह की आकृति बनाई जाती है। खासकर मांगलिक कार्यों में जैसे की किसी शादी में महिलाए इसे पहनकर ही विवाह सम्पन्न करती है। इसे विवाह के वक़्त काफी शुभ माना गया है।

पोमचा के प्रकार

अभी आपने जाना की पोमचा क्या है, आइए अब जानते है पोमचा के प्रकार के बारे में विस्तार से, पोमचा ओढ़नी मुख्या रूप से दो प्रकार की होते है, जिसे अलग अलग रंग से रंगाई की जाती है।

  • लाल पीला
  • लाल गुलाबी

लाल पीला पोमचा नवविवाहित महिला को दिया जाता है जब महिला लड़के को जन्म देती है तो उसको पीला वाला पोमचा ओढ़ने के लिए दिया जाता है एवं जबकि जब नवविवाहित महिला लड़की को जन्म देती है तो उसे लाल वाला पोमचा देने का रिवाज राजस्थान के लोगो के जरिये किया जाता है।

पोमचा किनारे से लाल होता है एवं इस लाल किनारे में फूलो की आकृति भी बनाई जाती है।

पोमचा की मान्यताएं

पोमचा को लेकर राजस्थान राज्य में कई मान्यताएं मानी जाती है। जिसके द्वारा कई शुभ कार्य संपन्न किए जाते है।

राजस्थान में नव प्रसूता स्त्री को सूर्य पूजन के वक़्त पोमचा को धारण करना काफी शुभ माना जाता है। जिसके धारण करने से स्त्री का चेहरा पहले से ओर अधिक सुवर्णमय हो जाता है।

यदि नव प्रसूता स्त्री को पुत्र होता है तो पीला पोमचा दिया जाता है एवं वही पुत्री होने पर लाल पोमचा दिए जाने की मान्यता है।

इसके अलावा हर शुभ कार्यों एवं पूजा में पोमचा ओढ़नी स्त्री के जरिये ओढ़ना काफी अच्छा माना गया है।

पोमचा लोकगीतों

  • पोमचा राजस्थान में लोकगीतों का भी विषय है। पुत्र के जन्म के अवसर पर “पीला पोमचा” का उल्लेख गीतों में आता है। एक गीत के बोल इस प्रकार है

” भाभी पाणीड़े गई रे तलाव में, भाभी सुवा तो पंखो बादळ झुकरया जी।

     देवरभींजें तो भींजण दो ओदेवर और रंगावे म्हारी मायड़ली जी।।”

अर्थात देवरकहता है कि भाभी तुम पानी लेने जा रही हो परंतु घटाएं घिर रही है, तुम्हारा पीला भीग जाएगा, रंगचूने लगेगा। तब भाभी कहती है कि कोई बात नहीं देवर मेरी मां फिर से रंगवा देगी।

  • एक ओर गीत में नवप्रसूता अपने पति से पिला रंगवाने को कहती है

पिळो रंगावो जी

पाँच मोहर को साहिबा पिळो रंगावो जी

हाथ बतीसी गज बीसी गाढा मारू जी

पिळो रंगावो जी


दिल्ली सहर से साईबा पोत मंगावो जी

जैपर का रंगरेज बुलावो गाढा मारू जी

पिळो रंगावो जी

  • एक ओर गीत में नवप्रसूता पत्नी अपने पति से पीला रंग रंगवाने का अनुरोध करती है।

” बाईसा रा वीरा, पीलो धण नै केसरी रंगा दो जी।”

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