मक्का मदीना की जानकारी और इतिहास क्या हैं | Makka Madina

मक्का मदीना की जानकारी और इतिहास क्या हैं | Makka Madina

मक्का मदीना की जानकारी और इतिहास क्या हैं | Makka Madina ki jankari aur history kya hai

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मक्का मदीना की जानकारी और इतिहास क्या हैं | Makka Madina ki jankari aur history kya hai – इस लेख में हम मक्का मदीना और काबा से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी देंगे जिसे पढ़ कर आप भी दंग रह जायेंगे। मक्का मदीना मुसलमानो का एक पवित्र स्थल माना जाता हैं और धर्मिक भावनाओ से जुड़ा हैं। और मुसलमान इसके प्रति बड़ी श्रध्दा और मुहब्बत दिखाते हैं इस लेख में हम आपको यह बतायेगे के यह मुसलमानो के लिए Makka Madina इतना प्रिय क्यों हैं।

मक्का और मदीना दो अलग- अलग शहर हैं जो अरब के एक देश सऊदी अरब में हैं। और यह मक्का शुरू से ही धार्मिक स्थल रहा हैं मुसलमान के बीच आने वाले जितने भी पैगम्बर ( ईश्वर के भेजे हुए दूत ) थे उनमे से अधिकतर मक्का मदीना में हज करने आते थे और वह लोगो को एक ईश्वर की तरफ बुलाते थे, के इस दुनिया का बनाने वाला एक ईश्वर हैं, उसकी ही इबादत करो।

मक्का मदीना का इतिहास क्या है?

मदीना का नाम मक्का से जोड़ कर लिया जाता हैं लेकिन मक्का अलग शहर हैं और मदीना अलग शहर हैं दोनों के बीच की दुरी लगभग 450 किलो मीटर की हैं। मक्का शुरू से ही धार्मिक स्थल रहा हैं। मक्का के अंदर शुरू से ही व्यापर करने के लिए बहार के देशो से लोग आते थे।

जैसे Egypt , Rome , Syria, Yemen इत्यादि देशो से लोग जाते थे और हमारे देश भारत से भी वह लोग व्यापर करने जाते थे। लेकिन पैगम्बर मुहम्मद साहब के आने के बाद यह और भी ज़्यादा मशहूर हो गया।

काबा का इतिहास

मक्का शहर की स्थापना बाबा आदम से ही हो गयी थी। और वह सबसे पहले उन्होंने ही काबा को बनाया था और तभी से काबा बना हुआ आ रहा है और अभी तक काबा की 13 बार मरम्मत हो चुकी हैं. और इससे बाद मे इब्राहिम पैगम्बर और उनके बेटे इस्माइल पैगम्बर ने काबा का उप्पर का हिस्सा बनाया था और जिस पत्थर पर चढ़ कर उन्होंने बनाया था उस पत्थर पर उनके पैर के निशान बन गए थे जो आज भी काबा में मौजूद हैं।

काबा की आखरी बार मरम्मत 1400 साल पहले मक्का के ही लोगो ने करी थी। लेकिन उन लोगो के पास इतना पैसा नहीं था के वह मक्का की पूरी मरम्मत कर सके। वैसे तो वह लोग बहुत आमिर थे लेकिन उनका कहना यह था के यह ईश्वर का घर हैं जहा पर लोग आते हैं

तो हम इससे हमारी हक़ की कमाई से ही बनायेगे जो हमने कमाई हैं उन कमाई से नहीं जो हमने गलत तरीके से कमाया हैं। इसलिए उन्होंने उससे आधा ही छोड़ दिया और तबसे ही वह आधा बना हुआ हैं।

और जो जगह उन्होंने खली छोड़ी थी उसके आस पास एक सीमा बना दी जिससे हतीम कहा जाता हैं। वैसे तो काबा के अंदर आम मुसलमान को नहीं जाने दिया जाता उसके अंदर सिर्फ VIP लोग ही जा सकते हैं लेकिन हतीम के अंदर आम मुसलमान भी जा सकता हैं और वह नामज़ पढ़ सकता हैं। और मक्का इस्लाम के धर्म गुरु पैगम्बर मुहम्मद के जन्म स्थल से भी जाना जाता हैं।

और वही पर ही पैगम्बर मुहम्मद पर ईश्वर का सन्देश पहली बार उतरा था मक्का से थोड़ी दूर एक गार के अंदर जिसका नाम गार – ए – हिरा हैं और वह आज भी वही मौजूद हैं। उससे तोड़ा नहीं गया। और मक्का वह शहर हैं जहा से दुनिया भर से लोग हज करने आते हैं

और हज करना हर उस मुसलमान पर ज़रूरी हैं जो आमिर हो जिसके पास इतना पैसा रुपया हो जो वह जाकर हज कर सकता हो। लेकिन कोई गरीब इंसान जिसके पास वह जाने के पैसे ना हो उसके लिए ज़रूरी नहीं के वह हज करे

और सारे देशो के लोग वह जाते हैं सिर्फ हज और उमराह के लिए नहीं बल्कि उस धार्मिक शहर और वह की धर्मीक जगहों को देखने के लिए भी जैसे मस्जिद आयशा और इसका नाम पैगम्बर मुहम्मद की बीवी के नाम पर रखा गया था ।

पुराने ज़माने में बादशाहो ने मक्का को अपने काबू में लेने के लिए बहुत सारी जंगे लड़ी वह चाहते थे यह शहर हमारे अधीन आजाये। और वह पर एक इलाका है हेजाज़ का वह उससे अपने अधीन करना चाहते थे।

मदीना का इतिहास

मदीना मक्का से 450 किलोमीटर पर बना एक शहर हैं जिसका पुराना नाम यसरिब (Yathrib ) था जो एक आम शहरों की तरह था लेकिन जब पैगम्बर मुहम्मद ने इस्लाम का प्रचार शुरू करा और लोगो को यह पैगाम पहुंचाया के एक ईश्वर की तरफ आओ और उसकी ही इबादत करो। तो मक्का के लोगो ने उनपर और उनके साथियो पर ज़ुल्म करना शुरू कर दिए।

पहले दुनिया में गुलामो का दौर चलता था और अरब में भी गुलाम हुआ करते थे तो उनमे जो लोग गुलाम हुआ करते थे अगर वह पैगम्बर मुहम्मद की बात मानते और एक ईश्वर की प्रार्थना / इबादत करते तो उनके मालिक उन्हें रेगिस्तान की गरम रेत पर बिना कपड़ो के लेटा देते और उन पर बड़े बड़े पत्थर रखते और उन्हें कोड़ो से मारते। और वह लोग ऐसे ज़ुल्म सहते रहे।

13 साल के बाद उन्होंने ईश्वर के आदेश से उनके साथियो के साथ मिलकर मदीना की तरफ रवानगी की जिसे हिजरत भी कहा जाता हैं। मदीना के अंदर इस्लाम फेल चूका था और मुसलमानो की वह ज़्यादा तादाद हो गयी थी

जैसे की आस पास के लोग मक्का में हज करने और व्यापर करने आते थे तो जब मदीना के लोग मक्का आते तो वह पैगम्बर मुहम्मद के सदाचार से प्रभावती होते और उनकी कही हुई बातो पर यक़ीन करते।

और इस्लाम की सबसे पहली मस्जिद भी मदीना में बनायीं गयी थी जिसका नाम मस्जिद क़ुबा रखा गया था जहा पर यात्री आते हैं और इस मस्जिद को पैगम्बर मुहम्मद ने अपने साथियो के साथ मिलकर खजूर की डालियो और रेगिस्तानी मिटटी से बनायीं थी।

और ऐसे ही पैगम्बर मुहम्मद की वजह से मदीना मशहूर हो गया और वह जाकर मुसलमानो ने राहत पायी क्योकि वह पर मुसलमानो को परेशां करने वाला कोई नहीं था। और वह से पैगम्बर मुहम्मद ने दूसरे देशो में अपने सन्देश वाहक भेजे और दूसरे देशो के बादशाहो को इस्लाम की पेशकश करी।

और 63 साल की उम्र में पैगम्बर मुहम्मद का निधन हो गया था और आपकी कब्र वही पर बनायीं गयी मदीना में आपके ही घर जिसके अंदर आपकी बीवी आयेशा के साथ आप रहते थे। और पैगम्बर मुहम्मद ने कब्रों को मज़बूत बनाने से मन करा था लेकिन बादमे बिगड़ आने की वजह से कब्रों को मज़बूत बनाया जाने लगा।

मक्का और मदीना क्यों प्रसिद्ध हैं ?

मक्का और मदीना काबा और इस्लाम की वजह से प्रसिद्ध हैं। और दोनों ही धार्मिक जगह हैं एक वह जगह हैं जहा ईश्वर का घर था और जहा दूसरे देशो से लोग हज करने आते थे और एक वह शहर हैं जहा पर पैगम्बर मुहम्मद और उनके साथियो ने हिजरत करी थी और वही पर आप रहने लगे और पैगम्बर मुहम्मद की मृत्यु भी मदीना शहर में ही हुई और वह एक मस्जिद बनायी गयी पैगम्बर मुहम्मद के नाम से जिसका नाम मस्जिद – उन – नबी रखा गया।

मक्का और मदीना में हिन्दू क्यों नहीं जा सकते?

ऐसा नहीं हैं के काबा के अंदर सिर्फ हिन्दुओ का जाना मना हैं बल्कि हर उस इंसान का मना हैं जो अल्लाह को नहीं मानता और जो पैगम्बर मुहम्मद को और उनसे पहले जो दूसरे पैगम्बर आये थे उन्हें भी नहीं मानता उसका मना हैं।
फिर चाहे वह हिन्दू हो, सिख हो, या ईसाई, यहूदी हो कोई भी हो उसका मना हैं सिर्फ मुसलमानो को छोड़ कर क्योकि जो अल्लाह को नहीं मानता उससे अल्लाह के घर में भी नहीं आने दिया जाता।

जैसे हम मानले एक इंसान हैं जो हमसे लड़ता झगड़ता हैं और हमारी बात नहीं मानता हमरी इज़्ज़त नहीं करता तो क्या हम उसे अपने घर में आने देंगे क्या ? नहीं हम उससे अपने घर में नहीं आने देंगे हम उससे यही कहेगे दोस्त पहले हमारी इज़्ज़त तो करो हमारी बात तो मनो फिर हमारे घर में आना।

इसी तरह काबा में उसी इंसान को आने दिया जाता हैं जो अल्लाह की और उसके घर की इज़्ज़त करे अगर ऐसा होता तो कोई भी हिन्दू या दूसरे धर्म के लोग आम मस्जिदों में नहीं जाते लेकन दूसरी मस्जिदों में जाने से उन्हें नहीं रोका जाता।
बल्कि मस्जिद जो इस्लम की सबसे पवित्र मस्जिद हैं मस्जिद उल हराम उसमे जाने से रोका जाता हैं। क्योकि अगर कोई शरीर इंसान वह गया तो वह कुछ भी गलत कर सकता हैं उम्मीद हैं दोस्तो आप समझ गए होंगे।

मक्का कितने साल पुराना हैं ?

वैसे तो मक्का बहुत साल पुराना हैं कहा जाता है बाबा आदम ने ही आकर मक्का में सबसे पहले ईश्वर का घर बनाया था जिसे काबा कहा जाता हैं लेकिन एक बार बाद मे फिर से पैगम्बर इब्राहिम और उनके बेटे पैगम्बर इस्माइल ने मिलकर बनाया था।
जो की पैगम्बर मुहम्मद के जन्म से लगभग 3500 साल (चुकी हमारे पास एक दम सटीक तारीख नहीं हैं ) पहले बनाया था। तो पैगम्बर इब्राहिम से लेकर अब तक मक्का की तारीख 5000 साल के लगभग होती हैं।

मक्का मदीना में सबसे पहले क्या था ?

मक्का और मदीना दोनों ही अरब देश के अंदर आते हैं जहा रेगिस्तान सबसे ज़्यादा हैं और वह एक बंजर ज़मीं पर हैं। लेकिन मक्का शहर के बारे में खा जाता हैं पैगम्बर आदम ने आकर वह सबसे पहले ईश्वर का घर बनाया था लेकिन मदीना के बारे में कोई खास इतिहास नहीं हैं।

क्योकि मदीना शहर का नाम पहले यसरिब (Yathrib ) था जो एक आम शहरों की तरह था लेकिन जब पैगम्बर मुहम्मद ने इस्लाम का प्रचार शुरू करा और लोगो को यह पैगाम पहुंचाया के एक ईश्वर की तरफ आओ और उसकी ही इबादत करो। तबसे यह भी मशहूर होने लगा और इसका नाम लिया जाने लगा धार्मिक स्थलों में और पैगम्बर मुहम्मद को मदीना से बहुत मुहब्बत और लगाओ था।

मक्का मदीना की स्थापना कब हुई थी ?

वैसे तो मक्का बहुत साल पुराना हैं कहा जाता है बाबा आदम ने ही आकर मक्का में सबसे पहले ईश्वर का घर बनाया था जिसे काबा कहा जाता हैं लेकिन एक बार बाद मे फिर से पैगम्बर इब्राहिम और उनके बेटे पैगम्बर इस्माइल ने मिलकर बनाया था।
जो की पैगम्बर मुहम्मद के जन्म से लगभग 3500 साल (चुकी हमारे पास एक दम सटीक तारीख नहीं हैं ) पहले बनाया था। तो पैगम्बर इब्राहिम से लेकर अब तक मक्का की तारीख 5000 साल के लगभग होती हैं।

क्योकि मदीना शहर का नाम पहले यसरिब (Yathrib ) था जो एक आम शहरों की तरह था लेकिन जब पैगम्बर मुहम्मद ने इस्लाम का प्रचार शुरू करा और लोगो को यह पैगाम पहुंचाया के एक ईश्वर की तरफ आओ और उसकी ही इबादत करो। तबसे यह भी मशहूर होने लगा और इसका नाम लिया जाने लगा धार्मिक स्थलों में और पैगम्बर मुहम्मद को मदीना से बहुत मुहब्बत और लगाओ था।

मक्का और मदीना में क्या अंतर हैं ?

मक्का और मदीना दोनों ही सऊदी अरब के शहर हैं जो मुसलमानो के धार्मिक स्थल हैं। और मुसलमानो को इनसे बड़ा प्रेम हैं। मक्का में अल्लाह का घर हैं जिसे काबा / मस्जिद ए हरम भी कहा जाता हैं। और मुसलमान हर साल यहाँ ईद उल अज़हा यानी बकरा ईद पर हज करने आते हैं।

और यहाँ पर उमराह भी होता हैं जो साल के किसी भी महीने में हो जाता हैं। और यहाँ पर मक़ाम इ इब्राहिम है जहा पर मुसलमान शैतान को पत्थर (कंकरिया) मारते हैं। और काबे में पहली बार पैगम्बर मुहम्मद पर ईश्वर का सन्देश उतरा था उस जगह को गार ए हिरा कहते हैं जो मक्का से थोड़ी ही दुरी पर हैं।

मदीना मक्का से 450 किलोमीटर दूर एक शहर हैं जब मक्का में मुसलमानो को बहुत ज़्यादा तकलीफे दी गयी। और मुसलमानो का मक्का में रहना दुश्वार कर दिया तब पैगम्बर मुहम्मद ने अपने साथियो को आदेश दिया के वह सब मदीना की तरफ हिजरत करे।
और जब सारे मुसलमान मक्का छोड़ कर चले गए तो सबसे बाद में पैगम्बर मुहम्मद ने हिजरत करी अपने साथी अबू बक्र के साथ।

और फिर पैगम्बर मुहम्मद मुहम्मद वही पर रहने लग गए और उन्हें मदीना से बहुत लगाओ हो गया और उन्होंने अपनी बाकी की ज़िन्दगी वही बितायी और वही शादिया करी और वही से सारी जंगे लड़ी और आखिर में पैगम्बर मुहम्मद का देहांत मदीना शहर में ही हुआ।

मक्का में सबसे बड़ा कबीला कौन सा था ?

मक्का में वैसे तो बहुत बड़े बड़े कबीले थे लेकिंन क़ुरैश सबसे बड़ा कबीला था। जो मक्का और काबा में बसा हुआ था जो सब कंट्रोल करता था। और जब कोई हाजी हज करने जाता तो उसकी मेहमान नवाज़ी क़ुरैश कबीला ही करता था।

काबा का रुख किधर हैं ?

काबा का को रुख नहीं हैं।

मक्का मदीना का नाम कैसे पड़ा

मक्का का नाम तो शुरू से ही मक्का चला हुआ आ रहा हैं लेकिन मदीना का नाम पहले yathrib यसरिब हुआ करता था लेकिन जब पैगम्बर मुहम्मद मदीना कहा यसरिब का मतलब फसाद और बदलाव होता हैं इसलिए इसका नाम आज से मदीना हैं।
(रेफ़्रेन्स : सहीह मुस्लिम 3353 )

मक्का मदीना में शैतान को पत्थर क्यों मरते हैं ?

जब अल्लाह ने पैगम्बर इब्राहिम को ख्वाब दिखाया के अपनी सबसे प्यारी चीज़ की क़ुरबानी दो तो आप एक दो दिन तो ऐसे रहे के आम ख्वाब होगा लेकिन एक ही ख्वाब बार बार आया तो आप समझ गए के अल्लाह मेरे बेटे इस्माइल की क़ुरबानी चाहता हैं।

आपने अपने घर पर कहा में इस्माइल को बहार घूमने ले जा रहा हूँ इन्हे तैयार कर दो पैगम्बर इब्राहिम और पैगम्बर इस्माइल जब एक जगह पहुंचे तो वह पर शैतान आ गया और पैगम्बर इब्राहिम को बड़गड़ाने लगा और आपको अल्लाह के हुक्म से दूर करने लगा और आपको परेशां करने लगा।

तब इब्राहिम पैगम्बर ने शैतान को पत्थर मारे थे तीन जगहों पर तब से ही यह प्रथा चालू हुई के जो भी हज करने जायेगा वह शैतान को पत्थर मरेगा तीन जगहों पर। और उस जगह को मीना कहते हैं।

काबा के अंदर क्या होता हैं ?

काबा के अंदर कुछ भी नहीं होता बीएस जो VIP लोग जो होते हैं जैसे किसी देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति या अरब केहि जो बढे लोग हैं उन्हें नमाज़ पढ़ने और इबादत करने की इजाज़त हैं।

भारत से मक्का मदीने की दुरी कितनी हैं ?

3,496 की दुरी भारत से सऊदी अरब की हैं। भारत से मक्का की दुरी 4,048 किलोमीटर हैं और मदीने की दुरी भारत से 4,053किलोमीटर हैं।

पैगम्बर मोहम्मद (Peace Be Upon Him) द्वारा मक्का छोड़ मदीना जाने की यात्रा को क्या कहा जाता हैं ?

पैगम्बर मोहम्मद (Peace Be Upon Him) द्वारा मक्का छोड़ मदीना जाने की यात्रा हिजरत कहा जाता हैं।

मक्का मदीना कौन सी दिशा में हैं ?

यह बात तो उसपर निर्भर करती हैं आप कहा से दिशा देख रहे हो लेकिन अगर हम भारत से मक्का मदीना की दिशा देखे तो मक्का भारत के पश्चिम दिशा में हैं और मदीना पश्चिम में हैं।

मक्का में कौन सी नदी हैं ?

मक्का में कोई भी नदी नहीं हैं। एक कुआ हैं जीसे जम जम कहा जाता हैं। और सऊदी अरब में जो समुद्र है उसका नाम पर्शियन गल्फ हैं।

मक्का कौन से देश में हैं ?

मक्का सऊदी अरब में हैं।

काबा कैसे बना ?

मक्का शहर की स्थापना बाबा आदम से ही हो गयी थी। और वह सबसे पहले उन्होंने ही काबा को बनाया था और तभी से काबा बना हुआ आ रहा है और अभी तक काबा की 13 बार मरम्मत हो चुकी हैं. और इससे बाद मे इब्राहिम पैगम्बर और उनके बेटे इस्माइल पैगम्बर ने काबा का उप्पर का हिस्सा बनाया था और जिस पत्थर पर चढ़ कर उन्होंने बनाया था उस पत्थर पर उनके पैर के निशान बन गए थे जो आज भी काबा में मौजूद हैं।

मदीना की राजधानी क्या हैं ?

मदीना एक शहर हैं जिसकी कोई राजधानी नहीं हैं।

काबा का मतलब क्या होता हैं ?

काबा को काबा उसकी चारो दिशाओ की वजह से कहा जाता हैं Cube को अरबी भाषा में Ka’b कहा जाता हैं इसलिए इससे भी काबा कहते हैं।

काबा और क़िबला में क्या फ़र्क़ हैं ?

काबा ईश्वर के घर को कहते हैं जो सऊदी अरब में मक्का शहर के अंदर बना हुआ हैं लेकिंन क़िब्ला उससे कहते हैं जिस तरफ रुख कर के मुसलमान नमाज़ पढ़ते हैं। पहले क़िब्ला मस्जिद अल अक़्सा को कहा जाता था लेकिन उसके बाद मुसलमान काबा की तरफ मुँह करके नमाज़ पढ़ने लगे।

सऊदी अरब में इस्लाम धर्म से पहले कौन सा धर्म था ?

सऊदी अरब में इस्लाम धर्म से पहले भी लोग एक अल्लाह को मानते थे लेकिन अल्लाह के साथ उन्होंने बहुत सारे दूसरे माबूद बना लिए थे और वह उनसे अपनी मुरदे पूजा करवाते थे दूसरे रस्मो रिवाजो से। और सऊदी में ईसाई धर्म के मान ने वाले भी बहुत लोग थे और यहूदी धर्म के मान ने वाले भी बहुत लोग थे |

सबसे पहले मुसलमान कौन थे ?

सबसे पहले मुसलमान बाबा आदम थे लेकिन जब वह गए तो लोगो में बिगड़ आ गया और मुसलमानो की धार्मिक ग्रन्थ में भी पैगम्बर इब्राहिम को मुसलमान कहा गया हैं लेकिन पैगम्बर मुहम्मद के आने के बाद सबसे पहले मुसलमान वह थे उसके बाद
– औरतो में सबसे पहली मुसलमान पैगम्बर मुहम्मद की बीवी खदीजा थी।
– मर्दो में सबसे पहले मुसलमान पैगम्बर मुहम्मद के दोस्त अबू बक्र थे।
– बच्चो में सबसे पहले मुसलमान पैगम्बर मुहम्मद के चाचा के लड़के अली थे।
– गुलामो में सबसे पहले मुसलमान पैगम्बर मुहम्मद के गुलाम ज़ैद थे।

दुनिया का सबसे पहला धर्म कौन सा हैं ?

दुनिया का सबसे पहला धर्म इस्लाम हैं जो बाबा आदम से चलता हुआ आ रहा हैं।

मुसलमान कहा से आये ?

मुस्लमान कही से नहीं आये बल्कि जबसे यह दुनिया बानी और जो इस दुनिया का सबसे पहले इंसान थे यानी पैगम्बर आदम वह खुद एक मुस्लमान थे जो खुद एक ईश्वर के आदेश का पालन करते थे।

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