जाने हज और उमरा यात्रा के बारे में 2022 | Hajj aur Umrah

जाने हज और उमरा यात्रा के बारे में 2022 | Hajj aur Umrah

जाने हज और उमरा यात्रा के बारे में 2022 | Hajj aur Umrah

जाने हज और उमरा यात्रा के बारे में 2022 | Jane hajj aur umrah yatra ke bare me

जाने हज और उमरा यात्रा के बारे में 2022 | Hajj aur Umrah – इस लेख में हम आपको हज और उमराह से जुड़ी हुई सारी बाते बताएंगे के हज और उमराह क्यों करा जाता हैं , हज और उमराह कहा करा जाता हैं और कब से यह शुरू हुआ था और हज और उमराह कैसे करा जाता हैं । जब अल्लाह ने पैगम्बर इब्राहिम को ख्वाब दिखाया के अपनी सबसे प्यारी चीज़ की क़ुर्बानी दो तो आप एक दो दिन तो ऐसे रहे के आम ख्वाब होगा लेकिन एक ही ख्वाब बार बार आया तो आप समझ गए के अल्लाह मेरे बेटे इस्माइल की क़ुर्बानी चाहता हैं।

आपने अपने घर पर कहा में इस्माइल को बहार घूमाने ले जा रहा हूँ इन्हे तैयार कर दो पैगम्बर इब्राहिम और पैगम्बर इस्माइल जब एक जगह पहुंचे तो वह पर शैतान आ गया और पैगम्बर इब्राहिम को बलगलाने लगा और आपको अल्लाह के हुक्म से दूर करने लगा और आपको परेशां करने लगा।

तब इब्राहिम पैगम्बर ने शैतान को पत्थर मारे थे तीन जगहों पर तब से ही यह प्रथा चालू हुई के जो भी हज करने जायेगा वह शैतान को पत्थर मरेगा तीन जगहों पर। और उस जगह को मीना कहते हैं। और जब शैतान चला गया तो पैगम्बर इब्राहिम और पैगम्बर इस्माइल दोनों आगे बड़े और एक जगह जाकर रुक गए तब पैगम्बर इब्राहिम ने पैगम्बर इस्माइल से कहा के अल्लाह ने तुम्हारी क़ुर्बानी मांगी हैं। तो इस्माइल भी एक ही बार में राज़ी होगये के अगर अल्लाह का हुक्म हैं तो आप देर मत करिये।

और फिर पैगम्बर इब्राहिम ने अपने बेटे पैगम्बर इस्माइल को लेटा दिया और उनकी आँखों पर पट्टी बाँध दी और उन्हें जिबाह करने लगे लेकिन छुरी नहीं चली फिर वह उठ गए फिर उन्होंने ऐसा ही करा लेकिन फिरसे छुरी नहीं चली तो उन्होंने छुरी के अंदर धार करी और फिर उससे चलने लगे लेकिन जब तीसरी बार चलने लगे तो छुरी तो चली लेकिन छुरी से पैगम्बर इस्माइल ज़िबाह नहीं हुए।

बल्कि एक दुम्बा उनकी जगह ज़िबाह हो गया जिसे अल्लाह ने फ़रिश्ते जिब्राईल के ज़रिये भेजा था और इस्माइल पैगम्बर वही साइड में खड़े हुए थे। मक्का मदीना

सफा मरवा के चक्कर लगाने की कहानी

और हज के अंदर एक और अरकान होता हैं जिससे सफा मरवा हैं उनके चक्कर लगाने होते हैं और इसके पीछे भी एक कहानी हैं। इब्राहिम पैगम्बर को ईश्वर का आदेश हुआ के अपने बच्चो और बीवी को जंगल में छोड़ आओ तो इब्राहिम पैगम्बर जब अपनी बीवी हाजरा और बेटे को जंगल में छोड़ कर जाने लगे तो उन्होंने बहुत मिन्नतें करी के हमे यहाँ छोड़ कर मत जाओ उन्हें पता चला यह ईश्वर का आदेश हैं तो वह चुप हो गयी थी ।

उन्हें ईश्वर पर पूरा विश्वास था और उन्होंने कहा जिस ईश्वर ने हमे यहाँ छोड़ने का कहा हमारी रक्षा भी वही करेगा। और जब कुछ समय उन्हें जंगल में बिताना पढ़ा तो उनके बेटे छोटे थे जिसे प्यास की तड़प बड़ा रुला रही थी। तो उस वक़्त उन्होंने सफ्फा मरवा दो वादिया हैं उनके चक्कर लगाती रही और पानी ढूंढ़ती रही और फिर उनके बेटे ने ज़मीन पर पैर रीगढ़े जिस वजह से वह से एक फव्वारा / चश्मा फुट पड़ा जिसे ज़म जम कहा जाता हैं।

हज और उमराह में क्या अंतर हैं ?

हज और उमराह में अंतर :-

हज जो हैं आप सिर्फ साल में एक बार कर सकते हो वह भी ज़ूल हिज्जा के महीने में और उसके लिए भी तारीख पहले से हैं 8, 9, 10, 11, 12 आप इन तारीखों के अलावा हज नहीं कर सकते। और हज के अंदर आपको मीना में जाना ज़रूरी हैं अगर आप वहाँ नहीं जाओगे तो आपका हज नहीं होगा।

और आपको हज में क़ुर्बानी (किसी जानवर को ज़िबाह ) करना होता हैं ईश्वर के नाम पर अगर आप यह भी छोड़ देते हो तो आपका हज नहीं होगा। और कहा जाता हैं मीना के अंदर जो भी दुआ मांगी जाती हैं वह पूरी करता हैं ईश्वर

उमराह भी हज की ही तरहां होता हैं लेकिन आपको कोई पाबन्दी नहीं हैं आप साल के किसी भी महीने में उमराह कर सकते हो। और उमराह के अंदर बीएस दो अरकान आपको करने होते हैं अगर आप ऐसा करते हो तो आपका उमराह मुकम्मल हो जाता हैं।

वह दो अरकान यह हैं के आपको काबा का तवाफ़ करना होता हैं तवाफ़ उसे कहते हैं जिसमे काबा के चारो तरफ चक्कर लगाए जाते हैं। और दूसरा अरकान यह हैं के आपको सफ्फा मरवा के सात चक्कर लगाने होते हैं। यह दोनों ही अरकान हज में भी होते हैं।

लेकिन हज के दूसरे अरकान उमराह में नहीं होते जैसे क़ुर्बानी करना मीना में जाना शैतान को कांकरिया मरना यह सब हज के अरकान हैं जिन्हे करना ज़रूरी हैं जिनके बिना हज नहीं होता।

मुस्लमान हज कैसे करते हैं ?

हज के पांच दिन होते हैं

आपको सबसे पहले आपको एहराम बांधना होगा मर्दो के लिए अहराम दो कपड़ो का होगा जिसे सिलाया नहीं जायेगा लेकिन औरतो को अहराम सिलाने की इजाज़त हैं उससे उनका पर्दा बना रहेगा इसलिए। मर्दो को दो चादर लेनी हैं एक चादर तो आपको तहबन्द जैसी बाँध लेनी हैं जैसे लुंगी बांधते हैं।

और एक चादर आपको आपके उप्पर वाले हिस्से पर ओढ़ लेनी हैं इन दो चादरों से आपके दोनों हिस्से पूरी तरह धक जायेंगे। और उप्पर वाली चादर को इस तरह से लपेटे के उसका दूसरा हिस्सा आपकी गर्दन पर ख़तम हो जाये जिससे आपको नमाज़ पढ़ने में आसानी होगी और आपका अहराम नहीं खुलेगा।

अब आप दो रकअत नमाज़ पढ़े और आपको नियत आप आपके एयरोप्लेन में करले अभी आपको नियत करने की ज़रूरत नहीं। और फिर मर्द थोड़ी ऊँची आवाज़ से और औरत धीमी आवाज़ से तलबिया पढ़े (यह दुआ आपको कही भी मिल जाएगी )।

हज का पहला दिन (8 ज़िल हिज्जा)

हज के पहले दिन में आपको मीना जाना होता हैं मीना जाने पर ज़्यादा फ़िज़ूल सामान ना ले बीएस कुछ सामान ज़रूर लेले मीना के अंदर आपको पांच नमाज़े पढ़ना हैं 9 ज़िल हिज्जा की फज़र तक

हज का दूसरा दिन (9 ज़िल हिज्जा)

इस दिन मुसलमानो को तकबीर ए तशरिक पढ़ना होती हैं। 9 ज़िल हिज्जा मीना से अराफात के लिए निकलना होता हैं और वही पर ज़ोहर और असर की नमाज़ पढ़ते हैं और अराफात का दिन दुआ के पुरे होने का दिन होता है। लेकिन अराफात के अंदर शाम तक तक रुकना ज़रूरी हैं।

फिर मुज़दलफा के लिए निकल जाए और मगरिब की नमाज़ वही पढ़े ईशा की नमाज़ के साथ और मुज़दलफा के अंदर भी जो दुआ मांगी जाती हैं वह पूरी होती हैं। और मुज़्दकफा में फज़र की नमाज़ के बाद तक रुकना बहुत ज़रूरी हैं।

हज का तीसरा दिन (10 ज़िल हिज्जा)

इस दिन हज करने वालो को ईद की नमाज़ नहीं पढ़ना होती हैं बस चार काम करने होते हैं।

  • पहला काम शैतान को कांकरिया मरना होता हैं। कंकरी को अंगूठे और पहली ऊँगली से पकड़ना होता हैं और सात कांकरिया मरना होता हैं
  • दूसरा काम कुर्बानी करना होती हैं।
  • तीसरा काम हलक़ या कसर करना होता हैं। अब अहराम ख़तम हो गया अब सिले हुए कपड़े भी पहन सकते हैं
    तवाफ़ ए ज़्यारत करना होता हैं

नोट:और इससे 10, 11, 12 किसी भी तारीख को कर सकते हैं

आप जब मस्जिद अल हराम में जायेंगे तो आपको हज्रे अस्वद की तरफ खड़े होना हैं और वही पर आपको पीछे हरी लाइट लगी हुई दिखेगी आपको उस लाइट के सीधे सामने खड़ा होना हैं जहा से आपके तवाफ़ के चक्कर शुरू होंगे फिर मर्द इस्टेबाह करे (इस्टेबाह उससे कहा जाता हैं जिसमे आपके अहराम से एक हाथ बहार निकल कर आपके अहराम के कपड़े को अपने सीधे हाथ कंधे पर डालना होता हैं। और आपका उल्टा खंदा दिखेगा ) .

अब हज्रे अस्वद के सामने खड़े हो जाये और स्तलाम करे (स्तलाम में आपको दूर से ही हज्रे अस्वद को चूमना अगर आप उसके पास नहीं जा सकते होतो आप ऐसा करे जैसे आप उससे हाथ लगा रहे हो ) .

तवाफ़ कैसे करे

मर्द तीन चक्कर शुरू में रमल करे ( रमल पहलवान के जैसे चलने को रमल कहते हैं ) फिर चार चाकर सादा चले जैसे चलते हैं औरत को रमल नहीं करना होता हैं औरत सादा जैसे चलती हैं वैसे ही चले ) अब ऐसे दोनों के सात चक्कर हो जायेंगे। अब तवाफ़ होंने के बाद रुकने यमनी के सामने खड़े होकर दुआ करें। हर सात चक्कर में आपको ऐसा ही करना हैं।

अब मक़ाम ए इब्राहिम के पास जाइये और वहाँ दो रक त नमाज़ पढ़िए। अगर मक़ाम ए इब्राहिम के पास जगह ना होतो कही पर भी खड़े होकर दो रकत नमाज़ पढ़िए। फिर मुल्तज़ाम पर जाइये और वह दुआ करिये। अब आबे ज़म ज़म पीजिये फिर जब आप मस्जिद अल हराम से सही के सफ्फा मरवा जाये तो मस्जिद से बहार निकलने से पहले एक बार और स्तलाम करे फिर बहार निकले।

सफ्फा मरवा के चक्कर कैसे लगाए

आपको सफ्फा और मरवा के सात चक्कर लगाने होंगे जब आप सफ्फा के लिए जायेंगे तो आपको पहुंचने पर एक हरी लाइट दिखेगी आपको आपके चक्कर शुरू उसी हरी लाइट से करने हैं लेकिन ध्यान रहे जो मर्द होंगे उन्हें दौड़ना होगा और औरतो को नहीं दौड़ना होगा बस उन्हें चलना होगा।

मतलब मर्दो को सफ्फा के चक्कर दौड़ कर लगाने होंगे और औरतो को चल कर अपने चक्कर पुरे करने होंगे अब ऐसे ही आप सफ्फा से मरवा की तरफ जायेंगे और मरवा से सफ्फा की तरफ जायेंगे और अपने सात चक्कर पुरे करेंगे। फिर मताफ़ में आकर सहीह की दो रकत निफल नमाज़ पढ़े।

फिर हलक करे या तकसीर करेतकसीर उससे कहते हैं जिसमे बालो को एक इंच से ज़्यादा काटना होता हैं। और हलक उससे कहते हैं जिसमे बाल पुरे कटवाने होते हैं। लेकिन औरतो को तकसीर करना होता हैं जिसमे उनकी छोटी से कुछ बाल काटे जाते है। अब उमराह पूरा हो जाता हैं

उमराह कैसे होता हैं ?

हम आपको बतायेगे के उमराह करने का सहीं तरीका क्या हैं।

आपको सबसे पहले आपको एहराम बांधना होगा मर्दो के लिए अहराम दो कपड़ो का होगा जिसे सिलाया नहीं जायेगा लेकिन औरतो को अहराम सिलाने की इजाज़त हैं उससे उनका पर्दा बना रहेगा इसलिए। मर्दो को दो चादर लेनी हैं एक चादर तो आपको तहबन्द जैसी बाँध लेनी हैं जैसे लुंगी बांधते हैं।

और एक चादर आपको आपके उप्पर वाले हिस्से पर ओढ़ लेनी हैं इन दो चादरों से आपके दोनों हिस्से पूरी तरह धक जायेंगे। और उप्पर वाली चादर को इस तरह से लपेटे के उसका दूसरा हिस्सा आपकी गर्दन पर ख़तम हो जाये जिससे आपको नमाज़ पढ़ने में आसानी होगी और आपका अहराम नहीं खुलेगा।

अब आप दो रकअत नमाज़ पढ़े और आपको नियत आप आपके एयरोप्लेन में करले अभी आपको नियत करने की ज़रूरत नहीं। और फिर मर्द थोड़ी ऊँची आवाज़ से और औरत धीमी आवाज़ से तलबिया पढ़े (यह दुआ आपको कही भी मिल जाएगी )। अब आप मस्जिद अल हराम यानी काबा में चले जायेंगे और वह जाकर आप एहतेकाफ की नियत करले।

उमराह का तरीका

आप जब मस्जिद अल हराम में जायेंगे तो आपको हज्रे अस्वद की तरफ खड़े होना हैं और वही पर आपको पीछे हरी लाइट लगी हुई दिखेगी आपको उस लाइट के सीधे सामने खड़ा होना हैं जहा से आपके तवाफ़ के चक्कर शुरू होंगे फिर मर्द इस्टेबाह करे (इस्टेबाह उससे कहा जाता हैं जिसमे आपके अहराम से एक हाथ बहार निकल कर आपके अहराम के कपड़े को अपने सीधे हाथ कंधे पर डालना होता हैं। और आपका उल्टा खंदा दिखेगा ) .

अब हज्रे अस्वद के सामने खड़े हो जाये और स्तलाम करे (स्तलाम में आपको दूर से ही हज्रे अस्वद को चूमना अगर आप उसके पास नहीं जा सकते होतो आप ऐसा करे जैसे आप उससे हाथ लगा रहे हो ) .

तवाफ़ कैसे करे

मर्द तीन चक्कर शुरू में रमल करे ( रमल पहलवान के जैसे चलने को रमल कहते हैं ) फिर चार चाकर सादा चले जैसे चलते हैं औरत को रमल नहीं करना होता हैं औरत सादा जैसे चलती हैं वैसे ही चले ) अब ऐसे दोनों के सात चक्कर हो जायेंगे। अब तवाफ़ होंने के बाद रुकने यमनी के सामने खड़े होकर दुआ करें। हर सात चक्कर में आपको ऐसा ही करना हैं।

अब मक़ाम ए इब्राहिम के पास जाइये और वहाँ दो रकत नमाज़ पढ़िए। अगर मक़ाम ए इब्राहिम के पास जगह ना होतो कही पर भी खड़े होकर दो रकत नमाज़ पढ़िए। फिर मुल्तज़ाम पर जाइये और वह दुआ करिये। अब आबे ज़म ज़म पीजिये फिर जब आप मस्जिद अल हराम से सही के सफ्फा मरवा जाये तो मस्जिद से बहार निकलने से पहले एक बार और स्तलाम करे फिर बहार निकले।

सफ्फा मरवा के चक्कर कैसे लगाए

आपको सफ्फा और मरवा के सात चक्कर लगाने होंगे जब आप सफ्फा के लिए जायेंगे तो आपको पहुंचने पर एक हरी लाइट दिखेगी आपको आपके चक्कर शुरू उसी हरी लाइट से करने हैं लेकिन ध्यान रहे जो मर्द होंगे उन्हें दौड़ना होगा और औरतो को नहीं दौड़ना होगा बस उन्हें चलना होगा।

मतलब मर्दो को सफ्फा के चक्कर दौड़ कर लगाने होंगे और औरतो को चल कर अपने चक्कर पुरे करने होंगे अब ऐसे ही आप सफ्फा से मरवा की तरफ जायेंगे और मरवा से सफ्फा की तरफ जायेंगे और अपने सात चक्कर पुरे करेंगे। फिर मताफ़ में आकर सहीह की दो रकत निफल नमाज़ पढ़े।

फिर हलक करे या तकसीर करे तकसीर उससे कहते हैं जिसमे बालो को एक इंच से ज़्यादा काटना होता हैं। और हलक उससे कहते हैं जिसमे बाल पुरे कटवाने होते हैं। लेकिन औरतो को तकसीर करना होता हैं जिसमे उनकी छोटी से कुछ बाल काटे जाते है। अब उमराह पूरा हो जाता हैं

उमराह करने में कितना खर्च आता हैं ?

उमराह करने में खर्च सरकार के हिसाब से चलता हैं जैसे कोरोना काल के पहले उमराह 55,000 में हो जाता था। लेकिन कोरोना काल के बाद बड़ती महंगाई से उमराह के खर्चा भी महंगा हो गया और अब उमराह एक लाख से दो लाख (1, 00, 000 – 2 ,00 ,000 ) तक चला जाता हैं।

लेकिन अगर कोई आम उमराह करना चाहे तो बहुत से बहुत वह डेढ़ लाख (1, 50, 000) तक चला जाता हैं। क्योकि उमराह करने में ज़्यादा खर्चा नहीं आता ज़्यादा खर्चा वहाँ पर रहने और खाने का आता हैं

उमराह कितने दिन का होता हैं ?

उमराह करने में कोई पाबन्दी नहीं हैं अगर आप चाहो तो उमराह दो से तीन घंटो में भी पूरा कर सकते हो। क्योकि इसके अंदर आपको ज़्यादा अरकान नहीं करने होते बीएस तवाफ़ करना होता हैं और साफा मरवा के चक्कर लगाने होते हैं और अपने बाल कटवाने होते हैं। और इनके बिच में बस छोटे कुछ अरकान पुरे करने होते हैं।

हज में किसकी पूजा करी जाती हैं ?

हज के किसी की पूजा नहीं करी जाती बस कुछ अरकान होते हैं जिन्हे पूरा करा जाता हैं जैसे तवाफ़ करना सफ्फा मरवा के चक्कर लगाना , मीना की वादियों में जाना कुर्बानी करना और हलक करना।

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